Saturday, January 3, 2009

"जान प्लीज गुस्सा मत हुआ करो"

'हाय जान प्लीज गुस्सा मत हुआ करो 'आई लव यू' कल रात 10.10 मिनट पर उसका ये 1 लाईन का मैसेज आया। आप विश्वास नहीं करेंगे उसके इस एक लाईन के मैसेज को पढ़कर मेरे दिल को कितना सुकून मिला। ऐसा लगा किसी डूबते को तिनके का सहारा मिल गया हो। यानी उसके दिल में अभी भी मेरे लिए प्यार है। मेरे गुस्सा करने से उसको भी कुछ महसूस होता है। यानी उसको भी मेरी परवाह है। बस ऐसा मन कर रहा था कि बार-बार उस मैसेज को पढूं। रात को 2.30 बजे भी मोबाईल उठाकर उस मैसेज को दुबारा पढ़ा और मोबाइल को अपने तकिये के नीचे रखकर लेट गया जैसे पहले किया करता था। ऐसा महसूस हुआ कि शायद वो पुराने दिन वापिस लौट आए हैं।

पर इतने सब अच्छे साईन को देखकर दिल में फिर डर भी लगता है कि कहीं फिर से पहले की तरह मेरे ये हसीन सपने कांच की तरह टूट ना जाएं। दिल कहता है कि उस पर विश्वास करूं पर दिमाग उस पर विश्वास नहीं करने देता। दिल को उसकी सारी बातें सच्ची लगती हैं पर दिमाग उसकी हर बात को संदेह के घेरे में देखता है। दिल कहता है कि वो आज भी तुमसे सच्चा प्यार करती है पर दिमाग कहता है कि वो सिर्फ एक दिखावा कर रही है। अजीब कशमकश में हूं समझ नहीं आता किस की बात पर विश्वास करूं। दिल की या दिमाग की। ये भी सच है कि दिल के हाथों मैं बहुत बेबस हूं।
बहुत लोगों ने कहा ये सब बेकार के चक्कर हैं इनमें मत पड़ों बहुत पछताओंगे। पर ये दिल किसी की भी बात मानने को तैयार नहीं है। ये आज भी उसे दिलों जान से ज्यादा चाहता है। उससे दूर होने के डर से ही जान आधी हो जाती है। आज भी जब पुजा करता हूं तो भगवान से उसी को मांगता हूं। पता नहीं मेरा क्या होगा सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया है अगर वो सच्ची है मेरा प्यार सच्चा है तो हम एक दिन जरूर एक-दूसरे के हो जाएंगे।

मुझे आंसू भरी हयात न दो,
गम के हाथों में मेरा हाथ न दो,
दो-चार कदम चलकर साथ छोड़ दो मेरा,
इससे बेहतर है कि तुम मेरा साथ ही न दो

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